Dhurandhar Movie Review : धुरंधर फिल्म का रिव्हीव
धुरंधर: एक दमदार फिल्म जो दिमाग और दिल दोनों हिला देती है |Dhurandhar Review FilmiSurvey.com Review
यार, कोई न कोई बोल देता है कि “भाई, अब बॉलीवुड में कुछ नया बचा ही कहाँ है?” लेकिन धुरंधर देखने के बाद लगा कि नहीं, अभी भी कई डायरेक्टर ऐसे हैं जो आपको सीट से चिपकाकर रख सकते हैं। इस फिल्म ने जिस तरीके से अपने टोन, एक्शन, कहानी और इमोशन्स को सेट किया है, वही इसे भीड़ से अलग बनाता है।
इस रिव्यू में मैं बताने वाला हूँ कि आखिर क्यों धुरंधर को मैं इस साल की सबसे ज़बरदस्त फिल्मों में से एक मानता हूँ, और क्यों आपको इसे थिएटर में जाकर ही देखना चाहिए।
फिल्म के टैक्निकल डिपार्टमेंट की बात करें तो भाई, कमाल कर दिया है! Dhurandhar Review
सबसे पहले बात करते हैं म्यूजिक और गानों की। आजकल रीमिक्स सुनकर अक्सर लगता है कि पुरानी यादों की बैंड बजा दी गई, पर इस फिल्म में जो गाने इस्तेमाल हुए हैं, वो पुराने भी हैं, नए भी हैं, और दोनों को इतनी खूबसूरती से मिक्स किया गया है कि सुनकर मज़ा आ जाता है। सच में, “सूटेबली और एक्सीलेंटली रिमिक्स्ड” कहना कोई ओवरस्टेटमेंट नहीं है।
इरशाद कामिल के लिरिक्स तो जैसे फिर से याद दिलाते हैं कि अच्छे शब्द दिल पर कैसे निशान छोड़ते हैं। आजकल की चिल्ल-पोंग दुनिया में भी कोई बैठकर इतने सोलफुल और सोचने पर मजबूर करने वाले बोल लिख सकता है, यह देखना ही अलग खुशी देता है।
विजय ए. गांगुली की कोरियोग्राफी ठीक-ठाक है। मतलब, गानों में डांस आपको बोर नहीं करेगा, लेकिन सीट पकड़कर “वाह” बोलने वाला भी नहीं है। चलो, इसे हम न ‘गलत’ कह सकते हैं, न ‘बहुत अच्छा’, बस ‘फेयर’ कह देते हैं।
लेकिन जहाँ फिल्म असली चमक दिखाती है, वो है बैकग्राउंड म्यूजिक। शश्वत सचदेव ने जो BGM दिया है न… भाई, सीरियसली, हर सीन में एड्रेनालिन बढ़ जाता है। ऐसा लगता है जैसे म्यूजिक आपकी नसों में दौड़ रहा हो।
सिनेमैटोग्राफी जो आपको थियेटर में चुप करा दे! Dhurandhar Review
अब आते हैं विकास नवलखा की सिनेमैटोग्राफी पर। मानना पड़ेगा, कैमरा ऐसे घूमता है जैसे किसी इंटरनेशनल प्रोजेक्ट में काम कर रहा हो। लोकेशन्स, कलर टोन, शॉट फ्रेमिंग – सब कुछ इतना शानदार है कि फिल्म को “एक्स्ट्राऑर्डिनैरली शॉट” कहना बिल्कुल सही बात है। कई बार तो मैं इतना खो गया कि दोस्तों की कमेंट्री भी सुनाई नहीं दे रही थी।
एक्शन इतना रॉ कि कई लोग आँखें फेर लेंगे – पर यह ही तो फिल्म की हिम्मत है
फिल्म का एक्शन थोड़ा अलग है। मतलब, यह वह टाइप नहीं है जिसमें हीरो पाँच लोगों को हवा में उड़ा देता है। यहाँ एक्शन गंभीर, ग्रूसम, और रियलिस्टिक है। और हाँ, यह वयस्क सर्टिफिकेट भी इसी वजह से बिल्कुल सही दिया गया है। कई सीन में आपको लगेगा कि “अरे भाई, इतना भी दिखाना था क्या?”, लेकिन फिर समझ आता है कि डायरेक्टर ने ये सब यूँ ही नहीं दिखाया, इसका मकसद है।
एक्शन कोरियोग्राफी टीम – Aejaz-Gulab, Sea Young Oh, Yannick Ben और Ramazan Bulut – ने तो जैसे साँस रोकने वाले सीन क्रिएट किए हैं। कई फाइट सीक्वेंस इतने मास्टरफुल हैं कि थिएटर में हल्की सी सीट हिलने लगती है।
सेट डिज़ाइन और आर्टवर्क – हर फ्रेम एक मायने रखता है! Dhurandhar Review
सैनी एस. जोहरे का प्रोडक्शन डिज़ाइन इतना डिटेल्ड है कि आप भूल जाते हैं कि यह फिल्म का सेट है। हर दीवार, हर गलियारा, हर बैकग्राउंड में कुछ न कुछ कहानी चल रही है।
साथ ही योगेश बानसोडे और नीलेश चौधरी की आर्ट डायरेक्शन भी टॉप-क्लास है। यह दिखता है कि फिल्म को सिर्फ बनाई नहीं, गढ़ा गया है।
शिवकुमार वी. पनिकर की एडिटिंग सुपर-शार्प है। फिल्म लंबी है, लेकिन एडिटिंग टाइट है, इसलिए बोरियत नाम की चीज़ नहीं आती।
अब बात करते हैं फिल्म के कुल इफ़ेक्ट की – भाई, यह एक दमदार हिट है
अक्सर हम बोलते हैं कि “हिट या फ्लॉप” पूरी तरह ऑडियंस पर निर्भर करता है। लेकिन धुरंधर वही फिल्म है जिस पर दर्शक खुद खिंचे चले जाएँगे। इसमें भले हिंसा ज्यादा है, रनटाइम लंबा है, और एडल्ट सर्टिफिकेट भी लगा है, लेकिन फिर भी यह फिल्म थिएटर में पैसा वसूल साबित होने वाली है।
शुरुआत में शायद महिलाएँ और फैमिलीज़ थोड़ा हिचकेंगी, लेकिन यकीन मानिए, वर्ड ऑफ माउथ इतना पॉजिटिव जाएगा कि वो भी आखिरकार इसे देखने आएँगे। क्योंकि यह फिल्म उन चीज़ों को सामने लाती है जिनके बारे में हमारे समाज का एक बड़ा हिस्सा जानकारी ही नहीं रखता।
रिलीज रिपोर्ट
फिल्म 5 दिसम्बर 2025 को रिलीज़ हुई और बॉम्बे में Inox में 14 शोज़ डेली मिल रहे हैं। मतलब, डिस्ट्रीब्यूटर्स को भी भरोसा था कि फिल्म चलेगी। और हुआ भी वही। ओपनिंग कई जगहों पर सुपरब थी। पब्लिसिटी भी जोरदार थी।
Jio Studios ने इसे बहुत बड़े स्केल पर रिलीज़ किया है, इसलिए आप इसे लगभग हर शहर में पा लेंगे।
कुल मिलाकर – धुरंधर एक ऐसी फिल्म है जिसे मिस नहीं करना चाहिए
अगर आप थ्रिल, दमदार एक्शन, बेहतरीन सिनेमैटोग्राफी और एक ऐसी कहानी चाहते हैं जो आपको सोचने पर मजबूर करे, तो यह फिल्म आपके लिए ही बनी है। यह फिल्मों की भीड़ में खड़े होकर चिल्लाती नहीं, बल्कि शांत रहकर आपको भीतर से हिला देती है।
खत्म करने से पहले एक छोटी सी रिक्वेस्ट
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अगर आपको फिल्में उतनी ही पसंद हैं जितना मुझे कॉफी और फ्री लेक्चर, तो यह रिव्यू आपके लिए था। मिलते हैं अगली फिल्म के साथ।
FilmiSurvey.com पढ़ते रहिए, मज़े में रहिए!
